एक तो ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या को अंतर्राष्ट्रीय जांचकर्ता इगनीस कालामार्ड ने ग़ैर क़ानूनी कार्यवाही घोषित कर दिया और इस बारे में अमरीका की ओर से दिए गए आत्म रक्षा के तर्कों को बेबुनियाद क़रार दे दिया और कहा कि यह बहुत ख़तरनाक परम्परा है कि किसी देश के अधिकारी को इस तरह केवल इस भ्रम में क़त्ल कर दिया जाए कि वह अमरीका के हितों पर हमला कर सकता था!
दूसरी बड़ी चोट अमरीका को यह लगी कि एक अज्ञात गुट ने अमरीकी सैनिकों के लिए सामान ले जाने वाले ट्रकों के कारवां को रोक लिया और उनमें आग लगा दी।
हो सकता है कि कालामार्ड की रिपोर्ट का असर सीमित हो क्योंकि अमरीका के अपराधों और मानवाधिकार हनन की सूची पहले से ही बहुत लंबी है लेकिन इस प्रकार का हमला करके इराक़ में अमरीकी सैनिक उपस्थिति के ख़िलाफ़ अपने अस्तित्व का एलान करने वाला नया संगठन अमरीका और उसके घटकों के लिए डरावने सपने से कम नहीं है। इस संगठन ने अपना नाम सेकंड सौरतुल ईशरीन ब्रिगेड रखा है। अपने बयान में इस संगठन ने हमले की ज़िम्मेदारी ली और धमकी दी कि यह हमले जारी रहेंगे साथ ही इराक़ियों को भी चेतावनी दी है कि अमरीकियों के साथ किसी भी तरह का सहयोग न करें। यह शायद हालिया महीनों में अमरीका के ख़िलाफ़ भड़क उठने वाली भावनाओं का ज्वालामुखी है जिससे अब लावा निकलने लगा है।
फ़र्स्ट सौरतुल इशरीन वह आंदोलन था जो 100 साल पहले इराक़ से अंग्रेज़ों को बाहर निकालने के लिए शुरु हुआ था और इसमें इराक़ के सभी समुदायों के लोग शामिल हो गए थे। इसकी ख़ास बात यह थी कि इसमे सांप्रदायिकता के आधार पर कोई काम नहीं होता था। शायद इसी लिए इस नए आंदोलन का नाम भी पुराने आंदोलन के नाम पर रखा गया है। इस आंदोलन का लक्ष्य इराक़ से अमरीकी फ़ोर्सेज़ को निकालना और इराक़ की धरती से अमरीका की सारी छावनियों को समाप्त करना है। यह संसद के उस प्रस्ताव को लागू करने के अर्थ में है जो जनरल क़ासिम सुलैमानी और उनके सहयोगी अबू महदी अलमुहंदिस की अमरीका के हाथों हत्या के बाद पास किया गया था।
ईरान बहुत संयम से काम करने वाला देश है जो कभी जल्दबाज़ी में नहीं पड़ता। हो सकता है कि यह ईरान का एक इंतेक़ाम हो, केवल जनरल क़ासिम सुलैमानी और अबू महदी अलमुहंदिस की हत्या का इंतेक़ाम नहीं बल्कि नतन्ज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर होने वाले हमले का भी इंतेक़ाम।
ईरान ने अब तक एलान नहीं किया है कि नतन्ज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर किसने हमला किया है लेकिन इराक़ी नेतृत्व के क़रीबी सूत्रों का कहना है कि इस मामले में शक की सूई इस्राईल की ओर घूमती है और इस्राईल भी इंतेक़ाम से डरा हुआ है जो ईरान की ओर से या यमन, लेबनान, इराक़ या फिर ग़ज़्ज़ा पट्टी में ईरान के मज़बूत घटकों की ओर से लिया जा सकता है।
इस्राईल के एक रिटायर्ड जनरल यत्सहाक़ ब्रेक ने हाआरेत्ज़ अख़बार में अपने एक लेख में लिखा कि सीरिया के भीतर इस्राईल की ओर से किए जाने वाले हमलों पर अगर ईरान ने अब तक जवाब नहीं दिया तो इसका मतलब केवल यह है कि ईरान अपने मिसइल डिफ़ेन्स सिस्टमों की तैनाती का काम पूरा कर रहा था। ईरान नही चाहता था कि काम पूरा होने से पहले छोटी मोटी झड़पें और टकराव शुरू हो। ईरान उचित समय के इंतेज़ार में है और उसके पास संयम की शक्ति बहुत है।
जिस समझौते पर ईरान की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख जनरल मुहम्मद बाक़ेरी और सीरिया के रक्षा मंत्री मुहम्मद अय्यूब ने दमिश्क़ में हस्ताक्षर किए और जिसके तहत ईरान सीरिया को अपने मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम दे रहा है वह शायद इस्राईल की ओर से होने वाले हमलों पर ईरान की जवाबी कार्यवाही है।
जनरल ब्रेक ने इसी लेख में लिखा कि इस समय इस्राईल के सैनिक टार्गेट्स, इंट्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा के केन्द्रों, पानी के प्रतिष्ठानों और आवासीय क्षेत्रों की ओर कम से कम 2 लाख मिसाइलों के रुख़ हैं जो बड़ी बारीकी से सटीक निशाना लगाते हैं जबकि इस्राईल के पास यह ताक़त नहीं है कि वह रोज़ाना इस्राईल पर गिरने वाले तीन हज़ार मिसाइलों का सामना कर सके।
इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति का समय अब बहुत कम बचा है। 2003 में जब अमरीका ने इराक़ पर क़ब्ज़ा किया और इराक़ियों का प्रतिरोध शुरू हुआ तो उस समय इराक़ियों ने कम से कम 5 हज़ार अमरीकी सैनिकों को मार गिराया और 35 हज़ार सैनिकों को घायल करके अमरीका भेजा था और अब उसी अंदाज़ में दूसरी लड़ाई शुरू हो गई है जिसकी एक झलक अमरीकी सैनिकों के लिए सामग्री ले जाने वाले ट्रकों पर हुए हमले में नज़र आती है। यह लड़ाई इराक़ से आख़िरी अमरीकी सैनिक के निकल जाने तक जारी रहेगी।
ईरान के नतन्ज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर होने वाले हमले के बारे में कहना चाहिए कि इंतेक़ाम निश्चित है आने वाले दिनों में बहुत सी चौंका देने वाली घटनाएं होंगी।